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स्टीफ़न मंडेल: गणित के दम पर 14 बार लॉटरी जीतने वाला जीनियस

तरीके के पीछे का आदमी

स्टीफ़न मंडेल कोई आम लॉटरी खिलाड़ी नहीं थे। 1934 में रोमानिया में जन्मे, उन्होंने अर्थशास्त्र और गणित की पढ़ाई की। लेकिन अकादमिक करियर चुनने के बजाय उन्होंने अपनी विश्लेषणात्मक सोच को उस चीज़ पर लगाया जिसे अधिकांश लोग सिर्फ़ किस्मत मानते हैं – लॉटरी।

1960 के दशक में, जब वे अब भी साम्यवादी शासन के तहत रह रहे थे, मंडेल ने एक गणितीय फ़ॉर्मूला तैयार किया जिसने जीतने की संभावनाओं को बेहतर बनाया। पहली बार इस फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल कर उन्होंने रोमानिया की राष्ट्रीय लॉटरी में दूसरा पुरस्कार जीता। इसी जीत ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया जाने का मौका दिया – और यहीं से उनकी असली कहानी शुरू हुई।

मंडेल का फ़ॉर्मूला: सभी संभावित टिकट खरीदना

मंडेल की प्रतिभा “लकी नंबर” चुनने में नहीं थी। उनका विचार कहीं अधिक साहसी था: जब जैकपॉट इतना बड़ा हो जाता कि ख़र्च और टैक्स निकालने के बाद भी लाभ बचता, तो सभी संभावित संयोजन खरीद लेना निश्चित मुनाफ़े की गारंटी देता।

इसे अकेले करना असंभव था। इसलिए मंडेल ने निवेशकों को जोड़ा और उनकी पूँजी से लाखों टिकट प्रिंट करवाए ताकि कोई भी संयोजन छूट न जाए।

यह रणनीति सफल रही। मंडेल ने लॉटरी 14 बार जीती और हज़ारों छोटे पुरस्कार भी जीते। वे मशहूर हो गए – वो आदमी जिसने साबित कर दिया कि गणित, कुछ समय के लिए ही सही, किस्मत को हरा सकता है।

मास्टरस्ट्रोक: वर्जीनिया, 1992

मंडेल की सबसे मशहूर जीत अमेरिका में हुई। 1992 में वर्जीनिया की लॉटरी का जैकपॉट 27 मिलियन डॉलर था और केवल 7.1 मिलियन संभावित संयोजन। मंडेल के लिए यह एकदम सही अवसर था।

निवेशकों की मदद से उनकी टीम ने लाखों टिकट ख़रीदे और लगभग सभी संयोजनों को कवर कर लिया। नतीजा ऐतिहासिक रहा: उन्होंने 27 मिलियन डॉलर का जैकपॉट और कई छोटे पुरस्कार भी जीत लिए।

यह घटना अंतरराष्ट्रीय सुर्ख़ियाँ बनी और लॉटरी आयोजकों ने नियम बदल दिए ताकि कोई और इस तरीके को दोहरा न सके।

कानूनी मुश्किलें और शांत सेवानिवृत्ति

वर्जीनिया के बाद मंडेल विवादास्पद शख़्सियत बन गए। भले ही उस समय उनकी रणनीति ग़ैरक़ानूनी नहीं थी, लेकिन नियम कड़े कर दिए गए और उनके प्रोजेक्ट कम लाभदायक होते गए।

बाद में वे आर्थिक परेशानियों में फँसे और निवेश से जुड़े मामलों के कारण इज़राइल में जेल भी गए। अंततः उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली और दक्षिण प्रशांत महासागर में वानुअतु के एक छोटे द्वीप पर बस गए, जहाँ उन्होंने शांत जीवन बिताया।

क्या यह आज संभव है?

मंडेल की कहानी एक अलग दौर की है। आज की लॉटरी प्रणालियाँ इस तरह की चालों को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई हैं:

  • संभावित संयोजनों की संख्या पहले से कहीं अधिक है।

  • बड़े पैमाने पर टिकट ख़रीदने पर सख़्त पाबंदियाँ हैं।

  • डिजिटल सिस्टम और ट्रैकिंग से सभी संयोजन कवर करना असंभव हो गया है।

संक्षेप में: जिस खामी का फ़ायदा मंडेल ने उठाया, वह अब मौजूद नहीं है। उनकी जीतें वास्तविक थीं, लेकिन आज लॉटरी पूरी तरह किस्मत का खेल है।

निष्कर्ष

स्टीफ़न मंडेल हमेशा याद किए जाएँगे उस आदमी के रूप में जिसने गणित से लॉटरी को हराया। उनकी हिम्मत, रणनीति और संगठन कौशल ने उन्हें 14 जैकपॉट दिलाए और लॉटरी की दुनिया हमेशा के लिए बदल दी।

लेकिन उनकी कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि आज भी, अंत में, लॉटरी का निर्णय किस्मत ही करती है।